—————– प्रकाश कपरुवाण।
ज्योतिर्मठ।
आद्य जगदगुरु शंकराचार्य की तपस्थली ज्योतिर्मठ -जोशीमठ के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व तथा यहाँ की भूमि संरचना की संवेदनशीलता, तलहटी पर बह रही अलकनंदा के तट पर हो रहे भूमि कटाव से धार्मिक एवं पर्यटन नगरी जोशीमठ के अस्तित्व को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1976मे गढ़वाल के तत्कालीन कमिश्नर महेश चन्द्र मिश्रा की अध्यक्षता मे एक कमेटी का गठन किया था, जिसने जोशीमठ का भूगर्भीय सर्वेक्षण सहित सभी विषयों पर गहन अध्ययन किया था। यदि उन सुझावों पर उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तराखंड निर्माण के बाद उत्तराखंड सरकार भी अमल कर लेती तो वर्ष 2023मे जोशीमठ को भू धसाव त्रासदी नहीं झेलनी पड़ती।
वर्ष 1976मे तो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित कमेटी ने जोशीमठ को बचाने के लिए सुझाव दिए थे लेकिन वर्ष 2023 की भू धसाव आपदा के बाद तो देश की आठ वैज्ञानिक संस्थाओं ने व्यापक अध्ययन व भू सर्वेक्षण के उपरांत जो रिपोर्ट भारत सरकार को दी है उसमे भी ट्रीटमेंट के अलावा कमोवेश वही सिफारिशें हैं।
फाइल फोटो……
तब मिश्रा कमेटी ने जोशीमठ की तलहटी पर अलकनंदा तट पर मजबूत तटबंद का निर्माण करने, खनन व टिपान पर प्रतिबन्ध लगाए जाने, जोशीमठ के निचले हिस्से मे विस्फोटों पर रोक लगाने, नगर मे बहने वाले नालों का सुनियोजित ट्रीटमेंट, ड्रेनेज एवं सीवर सिस्टम के अलावा भवन निर्माण व भार वहन क्षमता पर विशेष ध्यान दिए जाने के सुझाव दिए गए थे।
मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट व सुझाव इतने प्रभाव शाली थे कि नब्बे के दशक मे जब बीआरओ हेलंग-मारवाड़ी बाई पास निर्माण की जिद पर थी तब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट को आधार मानते हुए हेलंग-मारवाड़ी बाई पास निर्माण पर रोक लगाने का निर्णय दिया था।
उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकारों ने मिश्रा कमेटी के सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया और 2023आते आते जोशीमठ धसने लगा, मकान, गौशाला होटल रैन बसेरा सब इसकी जद मे आ गए।
दिन प्रतिदिन बढ़ते भू धसाव के हालात को देखते हुए सर्वेक्षण कार्य शुरू हुए, डेंजर जोन चिन्हित हुए, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया, भू धसाव की जद मे आए मकानों का मुआवजा दिया गया, और इसके बाद जोशीमठ के महत्व को समझते हुए भारत सरकार ने देश की आठ वैज्ञानिक संस्थाओं से जोशीमठ का व्यापक सर्वेक्षण कराया, इन वैज्ञानिक संस्थाओं ने विश्व स्तरीय आधुनिक तकनीकी एवं उपकरणों का प्रयोग कर जोशीमठ की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए सुझाव व रिपोर्ट भारत सरकार को प्रस्तुत की।
भारत सरकार के स्तर पर वैज्ञानिकों की रिपोर्ट व सुझाव के अध्ययन के बाद जोशीमठ की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले विभिन्न कार्यों के लिए करीब सौलह सौ करोड़ की धनराशि स्वीकृत करते हुए अवमुक्त की। दीर्घकालीन सुरक्षा के दृष्टि से जिन कार्यों को किया जाना है उनमें तटबंध निर्माण, स्लोप प्रोटेक्शन, सीवर व ड्रेनेज सिस्टम को मजबूती के साथ निर्माण करना तथा जिन मकानों का भुगतान हो चुका है उनका ध्वस्तीकरण कर मलवा नगर से बाहर डंपिंग जोन तक पहुँचाना आदि है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न है कि मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज करने का नतीजा 2023 मे सामने आया, और अब भू धसाव त्रासदी के तीन वर्ष बाद सुरक्षात्मक कार्य शुरू हो सके तो क्या वैज्ञानिकों के सुझाव के अनुरूप कार्य धरातल पर हो रहे हैं.?, क्योंकि मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट “1976” के बाद यदि सुझावों के अनुरूप सुरक्षात्मक कार्य हो जाते तो शायद जोशीमठ को भू धसाव की त्रासदी नहीं देखनी पडती।
बहरहाल देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट व सुझावों के अनुसार जोशीमठ की सुरक्षा के लिए जारी की गई भारी भरकम धनराशि का सही इस्तेमाल तो होना ही चाहिए। अब देखना होगा कि राज्य व केन्द्र सरकार की निगरानी मे हो रहे सुरक्षात्मक कार्यों से जोशीमठ का भविष्य कितना सुरक्षित रह सकेगा इस पर भू धसाव प्रभावितों की नजरें रहेंगी।











