डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
राजधानी देहरादून में करोड़ों रुपये की लागत से बना एक पुल फिर सवालों के घेरे में है. प्रेमनगर-नंदा की चौकी के पास नेशनल हाईवे पर स्थित यह पुल महज 16 दिन पहले ही जनता के लिए खोला गया था. पुल के ऊपर एक बड़ा जानलेवा गड्ढा बन गया है.हाल ही में तैयार किए गए इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। देहरादून नंदा की चौकी के पास बना नया पुल पहली मानसून की बारिश भी नहीं झेल पाया। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से पुल बनाया गया था। बारिश के बीच पुल का एक बड़ा हिस्सा धंस जाने से सड़क पर गहरा गड्ढा बन गया, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। देहरादून-पांवटा साहिब के पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी का पुनर्निर्मित मुख्य पुल भी अब सुरक्षित नहीं है. 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस पुल में बहुत बड़ा धंसाव हुआ है. चौंकाने वाली बात ये है कि इस पुल पर 16 दिन पहले ही यातायात शुरू हुए था. जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछली बरसात में वैकल्पिक पुल बहा था, अब नए पुल की एप्रोच रोड ने भी जवाब दे दिया! सवाल सीधा है—आखिर इस फेलियर की जिम्मेदारी कौन लेगा? हाल ही में तैयार हुए इस पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड क्षेत्र में भी भारी जलभराव के कारण यातायात प्रभावित रहा और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नंदा की चौकी में नवनिर्मित पुल शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। लगभग 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया यह नया पुल पहली ही मानसूनी बारिश में धंस गया, जिसके बाद इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं उल्लेखनीय है कि नंदा की चौकी स्थित पुराना मुख्य पुल 15 सितंबर 2025 की रात को अचानक क्षतिग्रस्त हो गया था। उस समय पुल की एबटमेंट वॉल और एक मुख्य स्लैब टूट जाने के बाद राजमार्ग पर आवागमन चालू रखने के लिए नदी में ह्यूम पाइप डालकर एक अस्थायी पुलिया तैयार की गई थी। यह वैकल्पिक पुलिया लगभग 10 महीने तक स्थानीय निवासियों और वाहनों के आवागमन का मुख्य सहारा बनी रही। इस गंभीर घटना के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों से संपर्क साधे जाने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी की तरफ से कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया गया. ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.अब यह देखना बाकी है कि संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत जांच कराई जाती है या नहीं, और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोके जाने के लिए क्या अहम कदम उठाए जाते हैं. फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण और मजबूत मरम्मत कराए जाने को बेहद आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके.इस शर्मनाक घटनाक्रम के बाद पुल का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था, संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदार की कार्यशैली तथा इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर उंगलियां उठने लगी हैं। स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और गुणवत्ता से समझौता करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग उठाई है। ऐसे में पहली ही मानसूनी बारिश में सड़क धंसने की घटना ने परियोजना की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











