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हजारों नंदा भक्त 2026 की राजजात यात्रा की प्रतिक्षा में

16/01/26
in उत्तराखंड
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हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।

थराली।  तो क्या इस 2026में प्रस्तावित हिमालयी महाकुंभ के रूप में विश्व विख्यात श्री नंदादेवी राजजात यात्रा नौटि वर्सेज कुरूड़ की भेंट चढ़ जाएगी, पिछले एक पखवाड़े से जिस तरह से आयोजन को लेकर बयान बाजी तेज हुई हैं उसे देख कर तो कुछ इसी तरह के संकेत मिल रहे हैं। अगर वास्तव में आयोजन को लेकर मैं बड़ा, मैं बड़ा चलता रहा हो निश्चित ही सदियों से अपनी कुल देवी की अराधना करने वाले देवी भक्तों की भावनाएं आहत होंगी।  वर्ष 2014 में आयोजित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा के सफल आयोजन के बाद से ही हजारों, हजार नंदा भक्त 2026 की राजजात यात्रा की प्रतिक्षा करने लगे थे,उस यात्रा में सामिल सैकड़ों नंदा भक्त जहां अब दिवंगत हो गयें होगी,वही तब बाल्यावस्था के बालक अब अपने तोरणय में पहुंच गए हैं। जिनका मन बाल्यावस्था में यात्रा में सम्मिलित होने को मचल रहा था 12 वर्षों के लंबे समयांतराल के बाद वें अब यात्रा में सम्मिलित होने के लिए वें पूरी तरह से तैयार बैठे हैं। हालांकि बधाण की राजराजेश्वर नंदा भगवती की प्रति वर्ष भादों मास में नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से वेदनी बुग्याल एवं वेदनी बुग्याल से नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा तक लोक जात यात्रा का आयोजन होता है, और इस में नंदा भक्त बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लेते हैं। किंतु 12 वर्षों में आयोजित होने वाली श्री नंदादेवी राजजात यात्रा का अलग ही महत्व है, इस यात्रा में जिस तरह से पूरे उत्तराखंड के देवी, देवताओं के प्रतिक सामिल होते हैं उसे देख पूरी राज्य की संस्कृति करीब 280 किलोमीटर की लंबी एवं कठिन यात्रा के दौरान जो देखने को मिलता हैं, शायद ही कही और मिल पाता हैं।इस वर्ष 2026 में पूरे 12 वर्षों के बाद एक बार फिर से श्री नंदादेवी राजजात यात्रा प्रस्तावित हैं।जिसकी का संपूर्ण कार्यक्रम एवं तिथियों की घोषणा आगामी 23 जनवरी बसंत पंचमी के दिन संभवतया की जाएगी। किंतु आयोजन को लेकर स्थान के महत्व,प्रथम पड़ाव, पड़ावों के महत्व, नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से चलने वाली नंदादेवी की उत्सव डोली का महत्व अधिक हैं या कि नौटि,कांसवा से आने वाली छतौली व चौसिंगया मेड़ा का महत्व अधिक सहित तमाम मुद्दों पर जिस तरह से खींचतान जारी है उससे आयोजन को लेकर कई तरह के सवालात खड़े हो रहे हैं, किंतु इन सब से दूर सच्चे मन से देवी की भक्ति करने वाले देवी भक्तों का मन निश्चित ही खींचतान से आहत हो रहा है। अपेक्षा जताईं जा रही हैं कि आने वाले दिनों में देवी की कृपा से ऐतिहासिक यात्रा को लेकर सबकुछ ठीक हो जाएगा, फिलहाल यात्रा को लेकर गतिरोध अपने चरम पर हैं। कुरूड़ की बधाणी की नंदादेवी का बधाण क्षेत्र के 365 एवं दशोली के 72 गांव में हकहकूक हैं। इसके अलावा प्रति वर्ष कुरूड़ से वदनी बुग्याल एवं वेदनी बुग्याल से नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा तक लोक जात यात्रा का आयोजन किया जाता हैं। पिछले राजजात यात्रा की तरह ही इस दफे भी नंदाधाम कुरूड़, लाटू धाम वांण एवं नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा को राजजात यात्रा एवं पर्यटन मानचित्र के नक्शे में सामिल नही किया गया। जबकि इस संबंध में लगातार शासन प्रशासन से पत्राचार किया जाता रहा हैं किंतु अब तक कोई भी संतोषजनक उत्तर नही मिल पाया है।जिससे पूरे बधाण एवं दशोली क्षेत्र में रोष व्याप्त हैं। इस संबंध में आगामी 19 जनवरी को नंदाधाम कुरूड़ में बधाण व दशोली की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई हैं जिसमें राजजात यात्रा को लेकर जरूरी निर्माण लिए जा सकते हैं।  पिछले वर्ष 2 नवंबर को नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में देवराड़ा मंदिर समिति,कुरूड़ मंदिर समिति एवं राजजात समिति नौटी की एक संयुक्त बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें तैयारियों को लेकर वृहद चर्चा करने के साथ ही परंपरागत रूप से श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को भव्य रूप से आयोजित करने का निर्माण लिया गया। राजजात समिति ने सरकार से गढ़वाल एवं कुमाऊं से राजजात यात्रा में सम्मिलित होने वाली देवी, देवताओं की छतौलियों,डोलियों एवं अन्य निशानों के रूटों का चिन्हीकरण कर उन्हें राजजात यात्रा के संयुक्त नक्शें में सामिल करने की मांग की हैं।रही कुरूड़ एवं देवराड़ा को पर्यटन मानचित्र में प्रर्दशित करने की तों इसे पर्यटन विभाग के द्वारा प्रर्दशित करना है,राजजात यात्रा को भव्य रूप से आयोजित करने के लिए सभी की सहभागिता बेहद जरूरी हैं राजजात समिति इसके लिए पूरी तरह से प्रयासरत भी हैं।

 

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