हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
इस वर्ष उच्च हिमालई क्षेत्रों में बसे ग्रामीणों को चुगान कर लाई गई कीड़ा जड़ी का उचित भाव ना मिलने के कारण लाखों रूपयों का नुकसान होने का अंदेशा
जताया जा रहा है। इस के चलते काश्तकारो की मेहनत पर पानी फिर सकता हैं।
दरसअल कीड़ा जड़ी अर्थात यार्सागुम्बा एक मूल्यवान जड़ी हैं, आमतौर पर यह जड़ी विश्व के चाइना, नेपाल तिब्बत के साथ ही भारत के उत्तराखंड में करीब 3500 मीटर की ऊंचाई पर बर्फीली पहाड़ियों तलहटी (बुग्यालों) में पाई जाती हैं, जिसमें शीतकाल के दौरान 4 से 6 महिनों तक बर्फ से ढकी रहती हैं,और इसी दौरान बर्फ के नीचे एक कीड़ा जन्म लेता हैं,अप्रैल-मार्च में बर्फ पिघलने के बाद घोस्ट मॉथ नामक जोकि मशरूम प्रजाति की जड़ी होती हैं,वह कीड़े के मुंह में जा घुस जाता हैं,यह मशरूम धीरे- धीरे कीड़े के मुंह में अपना विकास करने लगता हैं, मशरूम कीड़े का मांस को खाने लगता है,इस दौरान कीड़ा भी चलाते, फिरते रहता है,इसी दौरान जड़ी कीड़े के मुंह से बहार निकलने लगता हैं,जड़ी कीड़े के मुंह से बहार निकलते ही कीड़ा मर जाता हैं, किंतु जड़ी तब तक अपना विकास करता रहता हैं जबतक कि कीड़े का मांस रहता है, मांस के समाप्त होते ही,जड़ी का विकास रूक जाता हैं, और इस का नाम कीड़ा जड़ी पड़ जाता हैं, बुग्यालों में बर्फ के पिघलने के बाद इन बुग्यालों के नजदीक बसें गांवों के ग्रामीण मई के प्रथम पखवाड़े में इन बुग्यालों में अपना डेरा जमा कर कड़ी मशक्कत के बाद कीड़ा जड़ी का चुगान करते हैं।
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उत्तराखंड में कीड़ा जड़ी चमोली के देवाल,घाट व ज्योर्तिमठ विकासखंडों के बुग्यालों के साथ ही उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग बागेश्वर, पिथौरागढ़ के बुग्यालों में पाई जाती हैं।
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पिछले वर्षों तक अंतराष्ट्रीय बाजार में कीड़ा जड़ी 15 से 50 लाख रुपए प्रति किलों तक बिकता रहा है, जबकि किसानों से उनके ही गांवों में 8 से 10 लाख रुपए प्रति किलों में व्यापारी व भेषज संघ खरीदता रहा है, घेस के पूर्व उप प्रधान एवं कृषक धन सिंह बिष्ट एवं किसान हुक्म सिंह दानू ने बताया कि इस साल इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीड़ा जड़ी की मांग कम होने के कारण व्यापारी व भेषज संघ 5 लाख रुपए किलो में भी खरीदने को तैयार नही है। जिसे किसानों पर आर्थिक संकट छाने की आशंका बढ़ने लगी हैं। बताया कि अकेले घेस,हिमनी,बलांण,पिनाऊ,वांण,कुलिंग आदि गांवों में कई किलो कीड़ा जड़ी किसानों के पास मौजूद हैं किंतु दाम कम होने के कारण उसे वें बेच नही पा रहें हैं, किसान जड़ी के दाम बढ़ने के इंतजार में बैठे हुए हैं।
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दुर्लभ एकीड़ा जड़ी का उपयोग शारीरिक शक्ति, क्षमता, ऊर्जा, सहनशीलता बढ़ने के अलावा कैंसर,सांस सहित कई अन्य रोगों के उपचार में प्रयोग में लाई जाती हैं,इस जड़ी को (पहाड़ी वियाग्रा) के नाम से भी विश्व पटल में प्रसिद्ध हैं। क्यूं कि इस जड़ी को उत्तेजना वर्धक माना जाता हैं।











