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विश्व पृथ्वी दिवस का आयोजन

22/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। पृथ्वी दिवस हमारी धरती के लिए एक वैश्विक आंदोलन है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, जंगलों की कटाई और घटते प्राकृतिक संसाधन यह सब संकेत है कि अब जागने का समय आ चुका है। यह दिन यानी की पृथ्वी दिवस हमें याद दिलाता है कि हम सिर्फ इस ग्रह के निवासी नहीं बल्कि इसके रक्षक भी हैं। आज की तेज रफ्तार दुनिया में पृथ्वी को विकास के नाम पर लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए पृथ्वी दिवस एक चेतावनी देने का मौका है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़े बदलावों की शुरूआत कर सकते हैं। फिर चाहे वह प्लास्टिक का कम इस्तेमाल हो, पानी बचाना या पेड़ लगाना हो। पृथ्वी दिवस सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में इसको मनाया जाता है। हर साल इसकी एक खास थीम होती है, जोकि पर्यापरण से जुड़े अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करती है। अमेरिका में पहली बार बड़े पैमाने पर 22 अप्रैल 1970 को पर्यावरण जागरूकता प्रदर्शन आयोजित किया गया था। यह डेट इसलिए चुनी गई थी, जिससे कि विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स इस कार्यक्रम में शामिल हो सकें। यह दिन यह दिन आर्बर डे करीब होने की वजह से भी चुना गया था। लेकिन जब चेतना लालच, भय और अहंकार के कारण अस्थिर हो जाती है, तो उसका असंतुलन वातावरण में दिखाई देता है।पर्यावरण का बिगड़ना, जलवायु का अस्थिर होना और पारिस्थितिक तनाव केवल भौतिक परिणाम नहीं हैं। इन्हें मानवता की सामूहिक ऊर्जा के असर के रूप में भी समझा जा सकता है। भले ही हम इतने वर्षों से विश्व पृथ्वी दिवस मना रहे हैं और देश व दुनिया के पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं लेकिन इसके बावजूद पृथ्वी पर मंडराता खतरा जस का तस बना हुआ है। सबसे बड़ा खतरा तो इसे ग्लोबल वार्मिंग से है। धरती के तापमान में लगातार बढ़ते स्तर को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। वर्तमान में यह पूरे विश्व के समक्ष बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है। माना जा रहा है कि धरती के वातावरण के गर्म होने का मुख्य कारण ग्रीनहाऊस गैसों के स्तर में वृद्धि है। अगर इसे नजरअंदाज किया गया और इससे निजात पाने के लिए पूरे विश्व के देशों द्वारा तुरंत कोई कदम नहीं उठाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब धरती अपने अंत की ओर अग्रसर हो जाएगी। पृथ्वी दिवस राशिफल में वृष राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और शनि शामिल हैं, जिन्हें पृथ्वी की सबसे जमीनी राशि माना जाता है। यह पृथ्वी दिवस को एक व्यावहारिक एजेंडा देता है और पृथ्वी की शांति और सुंदरता पर प्रकाश डालता है। चार्ट में प्लूटो को कन्या राशि में रखा गया है, जो विकास और संरक्षण का सुझाव देता है। इसके अलावा, चंद्रमा और बृहस्पति वृश्चिक में पुनर्चक्रण और प्रकृति की पुनर्योजी शक्तियों का शासन करते हैं।पृथ्वी ने आदिवासियों के रूप में आने वाले मनुष्यों को बनाए रखा है लेकिन धीरे-धीरे पर्यावरण को बदल दिया और नष्ट कर दिया। पृथ्वी दिवस तभी सार्थक हो सकता है जब हम वनों की कटाई, शहरीकरण, औद्योगीकरण, प्लास्टिक प्रदूषण, अवैध शिकार आदि पर अंकुश लगाने का प्रयास करें। प्रत्येक दिन “पृथ्वी दिवस” ​​होना चाहिए। “प्रत्येक व्यक्ति को अपने छोटे से तरीके से वह सब कुछ बहाल करने का प्रयास करना चाहिए जो सबसे अच्छा है और पारिस्थितिकी तंत्र के कारण होने वाले नुकसान को संतुलित करने में मदद करता है। दुनिया में पिछली एक सदी में जितनी तरक्की हुई है वो पिछले हजार सालों में हुई तरक्की से भी ज्यादा है. हमारी इस तरक्की ने हमारे भौतिक जीवन को तो आसान बना दिया है, लेकिन तरक्की की इस चकाचौंध में हमने प्रकृति के साथ जो अन्याय किया उसे अनदेखा कर दिया. इसका खामियाजा अब हमें उठाना पड़ रहा है. ऐसे में अब धरती को बचाने के लिए वक्त आ गया है कि हम अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें. इसके लिए अब प्राकृतिक संसाधनों के ज्यादा दोहन के बजाय चीजों के रिसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग को अपनाने का वक्त आ गया है. इसके साथ ही वेस्ट कम करना, ऑर्गेनिक की तरफ जाना, इको फ्रेंडली सामानों का उपयोग लाइफ स्टाइल में शामिल करना जरूरी हो गया है. अब हमें ऊर्जा उत्पादन के पारंपरिक साधनों से हटकर ग्रीन एनर्जी की तरफ जाना जरूरी है. पारंपरिक साधन प्रदूषण को काफी बढ़ाते हैं. हमारा देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उपभोक्ता है. हम इसके लिए कोयला, तेल और नेचुरल गैसों पर निर्भर रहते हैं जो कि वायु प्रदूषण को बढ़ाने में काफी बड़ी भूमिका निभाते हैं. हम जितना बिजली को बर्बाद करेंगे उतना ही प्रकृति को नुकसान पहुंचेगा. ऐसे में जरूरी है कि हम तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर जाएं तो बिजली को बर्बाद करने की आदत में बदलाव लाएं.वायु प्रदूषण के मामले में भी हम काफी आगे हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की राजधानी सहित कई प्रमुख शहरों में एयर पॉल्यूशन काफी ज्यादा है. इससे हम खुली हवा में सांस तक नहीं ले पाते हैं. इसका सीधा असर हमारे पर्यावरण पर भी पड़ रहा है. ऐसे में आवश्यक है कि हम कम से कम निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करें. पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस करें और जरूरत होने पर ही निजी गाड़ियों का प्रयोग करें.हमारी लाइफ स्टाइल ने धरती की ऐसी किसी जगह को नहीं छोड़ा है जहां मानव निर्मित कचरा नहीं पहुंचा हो. जमीन के साथ ही समुद्र भी कचरे का डंपिंग सेंटर बनता जा रहा है जो पूरे समुद्री इको सिस्टम को बिगाड़ रहा है. ऐसे में जरूरी है कि हम कम से कम कचरा फैलाएं और ऐसी चीजों का प्रयोग करें जो रिसाइकिल हो सके. इसके साथ ही वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण को रोकने के लिए गीले और सूखे कचरे का प्रबंधन सही तरीके से करें. जंगल कम हो रहे हैं और भी बहुत बड़े खतरे मानव सभ्यता के सामने खड़े हैं। इन सभी खतरों का एक ही समाधान है कि विकास की दौड़ में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के क्रम को रोका जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले सालों में इस धरती पर मानव का रहना मुश्किल हो जाएगा। हम भले ही इतने वर्षों से विश्व पृथ्वी दिवस मान रहे हैं और देश व दुनिया के पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद पृथ्वी पर मंडराता खतरा जस का तस बना हुआ है। सबसे बड़ा खतरा तो इसे ग्लोबल वार्मिंग से है।धरती के तापमान में लगातार बढ़ते स्तर को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। वर्तमान में ये पूरे विश्व के समक्ष बड़ी समस्या के रुप में उभर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि धरती के वातावरण के गर्म होने का मुख्य कारण का ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में वृद्धि है। अगर इसे नजरअंदाज किया गया और इससे निजात पाने के लिये पूरे विश्व के देशों द्वारा तुरंत कोई कदम नहीं उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब धरती अपने अंत की ओर अग्रसर हो जाएगी।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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