हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली/देवाल।
रूपकुंड घाटी के ग्रामीणों में रोजगार को लेकर एक बार से फिर मायूसी छाने लगी हैं।जिस का एक बड़ा कारण वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त उत्तराखंड पौड़ी एवं प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ वनप्रभाग गोपेश्वर के पत्र बनें हैं,इन पत्रों में कहा गया है कि केवल रूपकुंड ट्रेक श्री नंदादेवी राजजात के यात्रियों के रात्रि प्रवास के लिए खोला गया हैं। बुग्यालों में टेंट लगाकर आम पर्यटकों के रात्रि प्रवास पर अब भी रोक पूरी तरह से कायम
हैं।
2014 में दायर एक जनहित याचिका पर फैसला देते हुए उच्च न्यायालय नैनीताल ने 21 अगस्त 2018 को बुग्यालों में पर्यटकों के रात्रि प्रवास पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम नई दिल्ली में रिट दायर की थी जिस पर इसी वर्ष 20 जुलाई को सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के कई निर्देशों को हटा दिया था।जिस पर 27 जुलाई 2026 को तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ सर्वेश कुमार दुबे ने वन क्षेत्राधिकारी देवाल को एक पत्र जारी कर सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थें।जिस पर 11 सितंबर 2026 को वन क्षेत्राधिकारी पूर्व पिंडर रेंज देवाल ने इंडिया हैक्स को 19 सहासिक पर्यटकों को रूपकुंड की यात्रा पर जाने के लिए परमिट जारी कर दिया।जिसके बाद देवाल ब्लाक के अंतिम गांव वांण से 19 सदस्यीय पर्यटकों का दल रूपकुंड की यात्रा पर निकली, पर्यटकों के यात्रा पर निकलने से पूर्व उत्साहित वांण के ग्रामीणों ने पर्यटकों का फूलमालाओं से स्वागत करते हुए इस की वीडियो फेसबुक पर वायरल कर दी। इस फेसबुक पोस्ट को देखने के बाद वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त उत्तराखंड पौड़ी आकाश कुमार वर्मा ने डीएफओ बद्रीनाथ को 12 सितंबर को एक कड़ा पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।जिस पर डीएफओ बद्रीनाथ प्रणाली स्वेश उमरे ने वन क्षेत्राधिकारी पूर्व पिंडर रेंज देवाल को पत्र भेजकर वन संरक्षक के जारी पत्र के अनुसार बुग्यालों में टेंट लगाकर पर्यटकों के रात्रि विश्राम पर हाईकोर्ट नैनीताल की रोक यथावत है। सुप्रीमकोर्ट ने केवल नंदा राजजात यात्रा में सम्मिलित होने वाले यात्रियों को ही छूट प्रदान करने के 20 जुलाई 2026 को निर्देश पारित किए हैं।यह छूट पर्यटकों के लिए अनुमन्य नही है। डीएफओ ने कहा हैं कि 11 सितंबर 2026 को इंडिया हैक्स को 19 सहासिक पर्यटकों को रूपकुंड की यात्रा करने को जारी परमिट को तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक निरस्त किया जाता है, और बिना उनकी (डीएफओ) की सहमति के रूपकुंड ट्रेक के कोई भी परमिट जारी नही किए जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। वन विभाग के आलाधिकारियों के पत्रों के अनुसार बुग्यालों में टेंट लगाकर रात्रि प्रवास करने के जहां एक ओर पर्यटकों के सपने एक बार फिर से चकनाचूर हो गये हैं।वही वांण,कुलिंग,दिदिना, लोहाजंग आदि गांव के लोग जोकि सीधे रूप से रूपकुंड,होमकुंड़ आदि ट्रेक रूटों से सीधे रूप से जुड़े हुए हैं उनके सपनों को पंख लगने से पहले ही टूटते नजर आ रहे हैं। जिससे उनमें मायूसी छाने लगी हैं।
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डीएफओ बद्रीनाथ के पत्र के अनुसार 11 सितंबर 2026 को वन क्षेत्राधिकारी पूर्व पिंडर रेंज देवाल के द्वारा परमिट बुक संख्या 77 के परमिट संख्या 2 व 3 जों कि इंडिया हैक्स को 19 पर्यटकों को रूपकुंड तक की यात्रा के लिए जारी किया था।उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया हैं। जिससे माना जा रहा है कि बुग्यालों में गयें पर्यटकों को वन विभाग के द्वारा वापस बुलाया जा सकता हैं।











