डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
हर साल हार्ट अटैक से करीब 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है. यह सिर्फ इस वजह से होता है, क्योंकि सही समय और सही जगह पर मेडिकल डिवाइस उपलब्ध नहीं रह पाता है. अगर लोगों को सही समय पर ईसीजी मिल जाए तो आसानी से बहुत सारी जानें बचाई जा सकती हैं. इसी समस्या का समाधान करने के लिए उत्तराखंड के स्टार्टअप सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज़) ने स्पंदन नाम का एक पॉकेट साइज डिवाइस बनाया है. इस डिवाइस से आप 99.7 फीसदी एक्युरेसी के साथ ईसीजी की रिपोर्ट हासिल कर सकते हैं. इसकी शुरुआत देहरादून के रजत जैन ने साल 2016 में की थी. हालांकि, कंपनी ने अपना बेहद छोटा डिवाइस स्पंदन जनवरी 2020 में लॉन्च किया.देश में 6 लाख से भी ज्यादा गांव हैं. इनमें से अधिकतर गांव में इंटरनेट है, लेकिन हेल्थ सर्विस हर जगह नहीं पहुंची है. कई बार इसकी कमी के चलते लोग मर भी जाते हैं. देरी के चलते कई मामलों में डॉक्टर भी मदद नहीं कर पाते हैं राज्य के युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उद्योग विभाग हजारों युवाओं को एक साथ अवसर प्रदान कर रहा है। प्रदेश के आईआईटी, आईआईएम, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, पालीटेक्निक और आइटीआइ संस्थानों के चार हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना होगा। इसके लिए विभाग पहले चरण में जल्द ही राज्य के 13 जनपदों में एक-एक स्टार्टअप बूट कैंप आयोजित करेगा। आज के बदलते दौर में इंसानों का दिल यानी हृदय कमजोर होता जा रहा है. साथ कम उम्र में ही प्रभावित हो रहा है. जिससे हार्ट अटैक या हृदय संबधी समस्याएं लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. ऐसे में हृदय रोगों की निगरानी करना बेहद जरूरी हो गया है. ताकि, समय पर इलाज मिल सके और जान बचाई जा सकते.ऐसे में दिल यानी हार्ट की निगरानी के लिए उत्तराखंड की एक स्टार्टअप कंपनी ने एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस लाया, जो कुछ ही मिनटों में दिल की किसी भी गड़बड़ी का आसानी से पता लगा सकता है. यह स्टार्टअप 2016 में शुरू हुई, जो आज 500 करोड़ नेट वर्थ वाली कंपनी बन चुकी है. ऐसे में उत्तराखंड के पहले स्टार्टअप के रूप में शुरू हुई साल 2016 में जब भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की. तब उत्तराखंड में भी स्टार्टअप योजना के तहत नए इनोवेशन और नए आइडियाज को प्रमोट करने की दिशा में सरकारों ने काम किया. इसी के चलते उत्तराखंड में जो पहला स्टार्टअप रडिस्टर्ड किया गया, वो आज 500 करोड़ वैल्यू वाली की एक बड़ी टेक कंपनी के रूप में पहचान बना रही है. इस नए स्टार्टअप को उस समय देहरादून स्थित नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीटेक कर रहे 21 वर्षीय रजत जैन ने अपने 23 वर्षीय भाई अर्पित जैन और अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर शुरू किया. जो हेल्थ केयर और टेक्नोलॉजी से जुड़ा था. जिसके तहत उन्होंने एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस डेवलप किया. जिसने दिल की बीमारी की जांच करने वाले भारी भरकम ईसीजी मशीन की जरूरत को देखते हुए इसे हर एक व्यक्ति के पॉकेट तक पहुंचा दिया. शुरुआत में उन्होंने इसे पॉकेट ईसीजी का नाम दिया, तो वहीं रजत जैन और उनके साथियों ने इस प्रोडेक्ट को ‘स्पंदन’ का नाम दिया. जो एक तरह से धड़कन का संस्कृत अनुवाद है. उन्होंने पोर्टेबल स्पंदन ईसीजी डिवाइस (बनाया है. जो छोटी और बैटरी से चलनी वाली डिवाइस है. जिससे कोई भी व्यक्ति कहीं से भी और कभी भी अपनी ईसीजी यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्रामजांच कर सकता है. उन्होंने इस डिवाइस से ईसीजी रिपोर्ट की सटीकता को जांचने के लिए कई ट्रायल किए. कई लोगों पर टेस्ट किए. साल 2016 से 2021 तक लगातार इसे रिसर्च और डेवलपमेंट फेज में रखा गया, फिर पहली बार इस टेक्नोलॉजी को रोहित और अर्पित दोनों भाइयों ने सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के रूप में लॉन्च किया. लॉन्च करने के बाद इस प्रोडेक्ट की ‘शार्क टैंक शो’ में एंट्री हई और इस नई टेक्नोलॉजी ने हेल्थ केयर सेक्टर में क्रांति ला दी. शार्क टैंक शो में इस प्रोडेक्ट और टेक्नोलॉजी को 5 स्टार रेटिंग मिली. साथ ही फंडिग भी मिली. साल 2016 में जब भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की. तब उत्तराखंड में भी स्टार्टअप योजना के तहत नए इनोवेशन और नए आइडियाज को प्रमोट करने की दिशा में सरकारों ने काम किया. इसी के चलते उत्तराखंड में जो पहला स्टार्टअप रडिस्टर्ड किया गया, वो आज 500 करोड़ वैल्यू वाली की एक बड़ी टेक कंपनी के रूप में पहचान बना रही है. पांचों लोगों ने अपनी शुरुआत अपने कॉलेज में उत्तराखंड उद्योग विभाग की मदद से लगाए गए इनोवेटर सेंटर से की, जो आज एक बड़ी हेल्थ केयर और टेक कंपनी के रूप में पैर जमा रही है. हाल ही में पांचों दोस्तों की इस कंपनी को टॉप ग्रोइंग टेक कंपनी की पहचान मिली है. आज यह कंपनी नए ऑफिस में शिफ्ट हो चुकी है. इस तरह से 5 लोगों की टीम के साथ कंपनी की शुरुआत हुई. आज ये टीम 200 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है. शुरुआती चुनौतियों के बारे में उन्होने बताया कि फाइनेंस से लेकर मेन पावर तक हर चीज में शुरुआत में काफी चैलेंज था, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका आइडिया नया था. लोगों को पहली बार में भरोसा नहीं हुआ और जब उन्होंने लोगों को एक बेटर सॉल्यूशन दिया तो लोगों में उनकी स्वीकारिता बढ़ी. स्टार्टअप से लेकर आज 500 करोड़ के सफर तक गलतियां भी की है और उनसे सीख भी ली है. उन्होने बताया कि जब उन्होंने इसकी शुरुआत की थी, तो सोचा नहीं था कि इतना बड़ा होगा. आज वो एक बड़ी कंपनी की तर्ज पर मार्केट में हैं. इसी तरह से लगातार आगे बढ़ते रहना ही उनका लक्ष्य है. बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को भी मजबूती मिलेगी क्योंकि एक स्वस्थ मजदूर ही एक मजबूत देश की नींव रखता है. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











