• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बिना क्वालिटी चेक खरीदा 70 लाख किलो घी, जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

11/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
10
SHARES
12
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से जुड़े लड्डू प्रसाद मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि मंदिर में प्रसाद के लिए इस्तेमाल होने वाला करीब 70 लाख किलो घी बिना उचित गुणवत्ता जांच के खरीदा गया। यह मामला न केवल श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, बल्कि खाद्य सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में लड्डू प्रसाद के लिए घी खरीद में सामने आया कथित घोटाला केवल एक प्रशासनिक अनियमितता का मामला नहीं है बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता और सार्वजनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होता बल्कि वह विश्वास, परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव का केंद्र होता है। ऐसे में जब प्रसाद जैसी पवित्र मानी जाने वाली वस्तु में मिलावट की आशंका सामने आती है तो उसका असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह आस्था की नींव को भी हिला देता हैजांच समिति की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि लगभग सत्तर लाख किलोग्राम घी बिना अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण के खरीदा गया और कई मामलों में लैब रिपोर्ट आने से पहले ही उसका उपयोग प्रसाद बनाने में कर लिया गया। यह स्थिति किसी एक स्तर की चूक नहीं बल्कि एक पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है जिसमें नियमों की अनदेखी, निगरानी की कमी और संभावित मिलीभगत शामिल हो सकती है। जब किसी धार्मिक संस्था में इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री का उपयोग हो रहा हो तो उसके हर चरण पर सख्त नियंत्रण और पारदर्शिता अपेक्षित होती हैरिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अगस्त 2022 की लैब जांच में सैंपलों में सिटोस्टेरॉल की मौजूदगी पाई गई जो वनस्पति तेल की मिलावट का संकेत माना जाता है। इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई और सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट करने जैसे कदम नहीं उठाए गए। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब मिलावट के संकेत स्पष्ट थे तो जिम्मेदार अधिकारियों ने तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए। इससे यह संदेह गहराता है कि कहीं न कहीं प्रणाली में गंभीर खामियां या जानबूझकर की गई लापरवाही मौजूद थीखरीद प्रक्रिया में भी कई ऐसी बातें सामने आईं जो चिंता बढ़ाती हैं। असामान्य रूप से कम बोली स्वीकार करना, नीलामी के बाद अनौपचारिक बातचीत के जरिए कीमत कम करने की अनुमति देना और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करना यह दर्शाता है कि आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी गई जबकि गुणवत्ता और सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया। शुद्ध घी की कीमत और बाजार की वास्तविकता को देखते हुए अत्यधिक कम कीमत पर सप्लाई होना अपने आप में संदेह पैदा करता हैइस पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क के काम करने की आशंका भी जताई गई है जिसमें सप्लायर, बिचौलिये और कुछ संस्थागत तत्व शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक प्रमुख सप्लायर ने वनस्पति तेल और अन्य एडिटिव्स का उपयोग कर मिलावटी घी तैयार किया और अयोग्य घोषित होने के बाद भी वह अन्य माध्यमों से सप्लाई जारी रखने में सफल रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि निगरानी प्रणाली में गंभीर कमजोरियां थीं और नियमों को लागू करने में इच्छाशक्ति की कमी थीपूर्व अधिकारियों और खरीद समिति की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं कि टेंडर नियमों को कमजोर किया गया और मिलावट की पुष्टि के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि संबंधित पक्षों का कहना है कि सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए और नियमों के तहत ही प्रक्रिया अपनाई गई। यह विवाद अपने आप में इस बात का संकेत है कि पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर स्पष्टता का अभाव थायह मुद्दा केवल एक राज्य या एक मंदिर तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे देश के धार्मिक संस्थानों के लिए एक चेतावनी है। भारत में मंदिरों में प्रसाद वितरण की परंपरा बहुत पुरानी है और यह श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। ऐसे में यदि कहीं भी गुणवत्ता से समझौता होता है तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ता हैपहले भी कुछ मामलों में प्रसाद या भोग की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर भारत के कुछ मंदिरों में समय समय पर नकली घी या निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग की शिकायतें सामने आई हैं जिनमें स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई की गई। हालांकि ये मामले इतने बड़े पैमाने पर नहीं थे लेकिन उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि धार्मिक संस्थानों में भी गुणवत्ता नियंत्रण की मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता है।इस तरह की घटनाएं यह भी दर्शाती हैं कि केवल धार्मिक आस्था के भरोसे व्यवस्था को नहीं छोड़ा जा सकता। आधुनिक समय में जब आपूर्ति श्रृंखला जटिल हो गई है और बड़े स्तर पर सामग्री की खरीद होती है तो वैज्ञानिक परीक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हो जाती हैं। यदि इन प्रक्रियाओं को सही ढंग से लागू किया जाए तो मिलावट जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता हैसरकार और संबंधित संस्थाओं के लिए यह जरूरी है कि वे इस मामले को केवल एक आरोप या राजनीतिक विवाद के रूप में न देखें बल्कि इसे एक सुधार के अवसर के रूप में लें। यदि जांच में दोष सिद्ध होते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, गुणवत्ता परीक्षण को अनिवार्य और समयबद्ध करने तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।श्रद्धालुओं के दृष्टिकोण से यह घटना बेहद संवेदनशील है। मंदिर में मिलने वाला प्रसाद केवल भोजन नहीं बल्कि आशीर्वाद का प्रतीक होता है। लोग इसे श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं और इसे पवित्र मानते हैं। ऐसे में यदि उसमें मिलावट की बात सामने आती है तो यह विश्वास को गहरा आघात पहुंचाती है। विश्वास एक बार टूट जाए तो उसे पुनः स्थापित करना बेहद कठिन होता हैइस पूरे प्रकरण से एक महत्वपूर्ण सीख यह मिलती है कि धार्मिक संस्थानों में भी पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों का समावेश आवश्यक है। केवल परंपरा के आधार पर व्यवस्था को चलाना अब पर्याप्त नहीं है। बदलते समय के साथ संस्थानों को भी अपने कामकाज में सुधार लाना होगा ताकि वे श्रद्धालुओं के विश्वास पर खरे उतर सकें।यह मामला केवल घी की गुणवत्ता या खरीद प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह उस व्यापक प्रश्न से जुड़ा है कि क्या हम अपनी आस्था से जुड़े संस्थानों में भी उतनी ही सख्ती और पारदर्शिता सुनिश्चित कर पा रहे हैं जितनी अन्य सार्वजनिक संस्थानों में अपेक्षित होती है। यदि इस प्रश्न का उत्तर नकारात्मक है तो यह समय है। कि हम इससे सीख लें और आवश्यक सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाएं ताकि भविष्य में आस्था और विश्वास दोनों सुरक्षित रह सकें।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share4SendTweet3
Previous Post

आपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरा होने पर दूध सैनिक इंस्टीट्यूट गढ़ी कैंट में कार्यक्रम आयोजित

Next Post

जज्बा हो तो क्या नहीं कर सकते, खड़ा किया कारोबार

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: खाद की खरीद सीमित होने से फसलों पर पड़ सकता है असर

May 13, 2026
17
उत्तराखंड

20 मई को होगा परवादून बार एसोसिएशन डोईवाला का वार्षिक चुनाव

May 13, 2026
27
उत्तराखंड

नीट यूजी पेपर रद्द अभ्यर्थी बोले ईमानदारी से मेहनत करने वालों पर आया संकट

May 13, 2026
7
उत्तराखंड

उत्तराखंड में खतरे में पड़ी जंगलों की सुरक्षा!

May 13, 2026
13
उत्तराखंड

ज्योतिर्मठ-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राज मार्ग पर विष्णु प्रयाग में निर्मित झूला पुल की छह साल बाद भी नहीं हुई मरम्मत

May 13, 2026
8
उत्तराखंड

कैबिनेट का बड़ा फैसला: पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि विकास और पलायन रोकने के लिए “स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति, 2026” को मंजूरी

May 13, 2026
10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67684 shares
    Share 27074 Tweet 16921
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45777 shares
    Share 18311 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38052 shares
    Share 15221 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37443 shares
    Share 14977 Tweet 9361
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: खाद की खरीद सीमित होने से फसलों पर पड़ सकता है असर

May 13, 2026

20 मई को होगा परवादून बार एसोसिएशन डोईवाला का वार्षिक चुनाव

May 13, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.