हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
इस विकासखंड के अंतर्गत लेटल गांव की एक गर्भवती महिला की जच्चा बच्चा सहित एम्बुलेंस में हुई मृत्यु के मामले की जांच को लेकर गर्भवती महिला के पति अपने दो बच्चों और माँ के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गए, जिससे करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित हुआ,बाद में थराली के उपजिलाधिकारी के द्वारा धरने पर बैठ व्यक्ति को पुलिस के सहयोग से सपरिवार उठा कर तहसील लाया गया जिसके बाद मोटर सड़क यातायात के लिए खुल पाया।
विगत 29 जून को लेटाल गांव की गर्भवती सरिता देवी पत्नी नरेंद्र कुमार (36) को प्रसव पीड़ा के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली लाया गया। घंटों प्रसूता को अस्पताल में रोकने के बाद उसकी स्थिति बिगड़ने के बाद उसे कर्णप्रयाग हायर सेंटर रेफर किया गया ।लेकिन कर्णप्रयाग पहुंचने से पहले ही जच्चा बच्चा दोनो की ही एम्बुलेंस में दर्दनाक मौत हो गई।घटना के बाद गर्भवती महिला के परिजनों ने सीएचसी थराली के चिकित्सा स्टाफ पर लापरवाही बरतने और 4 घंटे तक अस्पताल में ही रोके रखने का आरोप लगाते हुए घटना की जांच किए जाने एवं लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस एम्बुलेंस में प्रसूता को भेजा गया उसमें ऑक्सिजन सिलेंडर तक नही था। परिजनों ने घटना की जांच और लापरवाह डॉक्टरों पर कार्यवाही की मांग की थी लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी जांच न होने पर मृतक महिला के पति नरेंद्र कुमार मंगलवार को अपने 2 मासूम बच्चों 14 वर्षीय नितिन कुमार,10 वर्षीय नेहा के साथ ही अपनी मां मानी देवी के साथ थराली मोटरपुल पर धरने पर बैठ गए ,मृतका के पति ने जांच न होने पर पिंडर नदी में छलांग लगाने तक की चेतवानी दे दी जिसके बाद उपजिलाधिकारी थराली यशवीर सिंह रावत मौके पर पहुंचकर नरेंद्र कुमार को उठाया और समझा बुझाकर एवं पुलिस के सहयोग से तहसील ले गए इसके बाद पुल पर लगा जाम खुल पाया,इधर तहसील कार्यालय में एडीएम ने नरेंद्र से वार्ता कर उसकी मांगें सुनी,इस मामले में पूछे जाने पर नरेंद्र ने बताया कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी प्रसूता की मौत के मामले की जांच नही हो पाई है, बताया कि सोमवार को उन्हें इस मामले पर बयान दर्ज करवाने के लिए एक कॉल आया था और उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में बुलाया गया था, लेकिन मंगलवार को सुबह जब वें परिवार सहित अस्पताल पहुंचे तो जांच टीम वहां नहीं पहुंची थी, उनके द्वारा जांच टीम को दोबारा फोन किया गया तो जांच टीम द्वारा आने की स्थिति स्पष्ट करने की बजाय उन्हें लगता गुमराह किया गया जाता रहा जिसके बाद वो अपने बच्चों के साथ थराली पुल पर ही धरने पर बैठ गए। मामले को सुनने के बाद एडीएम थराली ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता की जिस पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मंगलवार को ही देर सांय तक थराली पहुंच कर पीड़ित परिवार के बयान दर्ज करवाने की बात कही गई।











