डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
सावन में होने वाले कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियों की आवाजाही में दिक्कत आम बात है. लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं होने वाला. कांवड़ यात्रा के समय इस रास्ते पर लोगों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी और गाड़ियां फर्राटा भरती नजर आएंगी. उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने 17 जुलाई को कहा था कि 30 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे (एक्सप्रेस-वे) का उपयोग नहीं किया जाएगा.कांवड़ यात्रा के सुव्यवस्थित संचालन को लेकर हरिद्वार में आयोजित अंतरराज्यीय समन्वय बैठक की अध्यक्षता करते हुए बर्धन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रियों के आवागमन के लिए एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल नहीं किया जाए. उन्होंने इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को समय रहते आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.इस बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के अलावा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) तथा अन्य केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. कांवड़ यात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर जाते हैं. उन्होंने कहा कि यात्रा का सफल संचालन सभी संबंधित राज्यों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करता है. उन्होंने सभी राज्यों से कांवड़ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने तथा यात्रा अवधि के दौरान लगातार सतर्क रहते हुए आपसी समन्वय से काम करने का आग्रह किया. हरिद्वार कांवड़ यात्रा का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यात्रा मार्ग से जुड़े किसी भी राज्य या जिले में होने वाली घटना का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए सभी राज्यों को अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा, यातायात और आपदा प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कांवड़ यात्री अपने साथ वैध पहचान पत्र रखें और किसी भी प्रकार के घातक हथियार या प्रतिबंधित सामग्री के साथ यात्रा में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए.इस बैठक में सभी राज्यों ने साझा कार्ययोजना के तहत समन्वित और एकजुट होकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई. इस दौरान निर्णय लिया गया कि कांवड़ मेले के प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्यों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और संयुक्त निगरानी की व्यवस्था विकसित की जाएगी. साथ ही उत्तराखंड की सीमाओं पर पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ संयुक्त चेकपोस्ट और बैरियर स्थापित किए जाएंगे.।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











