डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल की सुबह 8 बजे आम श्रद्धालुओं के दर्शन को लेकर खोल दिए जाएंगे. ऐसे में जिला प्रशासन स्तर से तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. प्रशासन का दावा है कि इस बार यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी चीज की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य, पेयजल के साथ ही रहने और खाने की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है, जबकि गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर हाईटेक तकनीकी की मदद से नजर रखी जाएगी, जिससे कोई घटना होने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके.केदारनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस वर्ष यात्रा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है. प्रशासन द्वारा गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी के लिए एक हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है. इसके तहत एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से यात्रा रूट पर हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यात्रा मार्ग पर 90 कैमरे लगाए गए हैं, जिससे हर एंगल से निगरानी संभव हो सकेगी.केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल की सुबह 8 बजे आम श्रद्धालुओं के दर्शन को लेकर खोल दिए जाएंगे. ऐसे में जिला प्रशासन स्तर से तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. प्रशासन का दावा है कि इस बार यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी चीज की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य, पेयजल के साथ ही रहने और खाने की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है, जबकि गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर हाईटेक तकनीकी की मदद से नजर रखी जाएगी, जिससे कोई घटना होने पर त्वरित कार्रवाई की जा सककेदारनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस वर्ष यात्रा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है. प्रशासन द्वारा गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी के लिए एक हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है. इसके तहत एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से यात्रा रूट पर हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यात्रा मार्ग पर 90 कैमरे लगाए गए हैं, जिससे हर एंगल से निगरानी संभव हो सकेगी. भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को इन क्षेत्रों के लिए करीब 700 करोड़ से ज्यादा की रकम स्वीकृत की है, उधर इन संवेदनशील 100 डेंजर जोन में से करीब 80 जोन पर काम भी शुरू कर दिया गया है. आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि साल 2025 में यात्रा रूट पर ऐसे करीब 53 बड़े लैंडस्लाइड जोन थे, जो बेहद ज्यादा खतरनाक माने गए. खास बात यह है कि इस साल यात्रा रूट पर करीब 100 डेंजर जोन चिन्हित किए गए हैं, जो बड़े लैंडस्लाइड के कारण संवेदनशील माने गए हैं. पिछले कई दिनों से यहां पहाड़ियों पर हिमपात से भारी मात्रा में नई बर्फ जम रही है, जिसके बोझ से ग्लेशियर टूट रहे हैं। ग्लेशियर वैज्ञानिक ने बताया कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों का टूटना सामान्य घटना है। लेकिन यह केदारनाथ से 6 से 7 किमी ऊपर हो रही है, इसलिए सतर्क रहने की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक के उपयोग को और बढ़ाते हुए प्रशासन 5 ड्रोन कैमरों से भी निगरानी करेगा। वहीं यात्रा मार्ग पर संचालित लगभग 5 हजार घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड, टोकन और चिप लगाई जा रही है, जिससे उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सके। इन व्यापक व्यवस्थाओं से जहां कानून व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं अक्सर होने वाली श्रद्धालुओं के बिछड़ने की समस्या का भी समाधान होगा।कैमरों और तकनीक की मदद से ऐसे लोगों को जल्दी खोजकर उनके परिजनों से मिलाया जा सकेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार यात्रा अनुभव प्रदान किया जाए।जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि केदारनाथ धाम से लेकर गौरीकुंड तक लगाए गए कैमरों से यात्रा व्यवस्थाओ के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाएगी। जिला प्रशासन के अनुसार, इन कैमरों की मदद से न केवल सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी तेजी से किए जा सकेंगे। कंट्रोल रूम के जरिए अधिकारी लाइव फीड देखेंगे, जिससे यात्रा रूट पर कहीं भी भीड़ बढ़ने या रास्ता बाधित होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।”हमारा लक्ष्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करना है। तकनीक के इस उपयोग से हम हर यात्री की सुरक्षा पर व्यक्तिगत ध्यान दे पाएंगे।लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।












