डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
श्रावण मास, चातुर्मास का पहला मास होता है. भगवान नारायण के योगनिद्रा में चले जाने के बाद भगवान शिव इस सृष्टि का दायित्व संभालते हैं. भगवान शिव ही सम्पूर्ण सृष्टि के पालनकर्ता और सृजनकर्ता होते हैं. सावन मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भगवान शिव को बड़ी शांति मिलती है, क्योंकि भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए विषपान किया था और इसी कारण होने नीलकंठ महादेव भी कहा जाता है. इसलिए जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. सावन मास की महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मंगलवार को धर्मनगरी हरिद्वार, भगवान शिव की भक्ति में डूबी नजर आई. सुबह से ही शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. स्थानीय लोगों के साथ ही दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारे गूंजते सुनाई दे रहे हैं. सुबह तड़के से ही श्रद्धालु गंगाजल, दूध, दही, फल फूल, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अन्य पूजन सामग्री लेकर शिवालयों की ओर पहुंचने लगे. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का विधि विधान से पूजा अर्चना किया. कई मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक और पूजा अर्चना भी आयोजित की गई.कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव और माता सती की कथा से जुड़ा प्रमुख तीर्थस्थल है. यहां पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की. इसी तरह बिलकेश्वर महादेव मंदिर और नीलेश्वर महादेव मंदिर समेत धर्मनगरी के अन्य शिवालयों में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही. श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधनों और पुलिस प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं की गईं. सावन मास की महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने माता सती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पृथ्वी लोक पर दर्शन दिए थे और विवाह की स्वीकारोक्ति भी दी थी. इसलिए भी आज के दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए आज के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति को पूरे श्रावण मास के बराबर पूजा अर्चना करने का फल प्राप्त होता है. उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक करते समय महामृत्युंजय मंत्र और पंचाक्षर मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है. इस बार की महाशिवरात्रि में तो पुष्य नक्षत्र भी मिल रहा है, इसलिए इस बार और भी अधिक श्रेष्ठ योग बन रहे हैं. आज के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से विवाह अड़चन, संतान प्राप्ति और धन धान्य की कामना की पूर्ति होती है. सावन की महाशिवरात्रि के अवसर पर हरिद्वार के शिवालयों में देर शाम तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है. धर्मनगरी का वातावरण पूरी तरह शिवमय बना हुआ है. हरिद्वार से चार करोड़ से अधिक कांवड़िए गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों को रवाना हो चुके हैं और अब आसपास के इलाकों के लोग गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं.देवभूमि उत्तराखंड में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवालयों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. शिव और शक्ति के मिलन के इस पवित्र पर्व पर तड़के से ही मंदिरों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. राजधानी देहरादून सहित प्रदेशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा. ।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











