डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
आज के इस आधुनिक युग में नई-नई तकनीकी का इजाद होता जा रहा है, जिससे मेहनत भरे कामों में काफी सहूलियत मिल जाती है. ऐसा ही एक तकनीकी ड्रोन है, जिसके माध्यम से समय की बचत करते हुए तमाम काम किए जा सकते हैं. हालांकि, उत्तराखंड सरकार ड्रोन के जरिए जहां एक ओर मेडिसिन को डोर टू डोर पहुंचाने के प्लान पर काम कर रही है, तो वहीं, दूसरी ओर ड्रोन के माध्यम से किसानों को भी लाभ पहुंचाने की कवायद में आईटीडीए जुट गया है.वर्तमान समय में छोटे-छोटे सामानों को एक जगह से दूसरे जगहों पर पहुंचे में ड्रोन काफी कारागार साबित हो रहे है. भारत में भी ड्रोन को बढ़ावा के लिए केंद्र सरकार तमाम योजनाएं संचालित कर रही है. ताकि ड्रोन का इस्तेमाल बेहतर ढंग से किया जा सके. कोविड काल के दौरान देश के दुरुस्त क्षेत्रों में दवाइयां और वैक्सीन को भेजने का प्रयोग किया गया था, जोकि सफल रहा था. इसी क्रम में आईसीएमआर ने हाल ही में ड्रोन के माध्यम से ब्लड सैंपल को भी हॉस्पिटल से लैब तक पहुंचाने का सफल परीक्षण किया. कुल मिलाकर आज के इस आधुनिक दौर में ड्रोन मेडिकल के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति ला सकता है, जिसका लगातार परीक्षण किया जा रहा है. हाल ही में उत्तराखंड सरकार में जीवनदायनी मेडिसिन को भी घर-घर तक पहुंचने के लिए ड्रोन का सफल प्रशिक्षण किया था, तो वही, अब उत्तराखंड सरकार किसानों को ड्रोन का फायदा मिल सके इस दिशा में काम कर रही है. इसके साथ ही ड्रोन का बेहतर इस्तेमाल हो सके, इसके लिए आईटीडीए ड्रोन पॉलिसी तैयार कर रही है. दरअसल, किसान एग्रीकल्चर ड्रोन के जरिए फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव और खेतो में बुवाई कर सकते है. इसके अलावा किसान घर बैठे ही अपने खेतों को निगरानी भी कर सकते है. जिससे किसान कम मेहनत के साथ ही समय भी बचा सकते है. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में एग्रीकल्चर ड्रोन किसानों के लिए कितना कारागार साबित होगी? उत्तराखंड में आपदा के समय बचाव कार्यों में ड्रोन महत्वपूर्ण साबित होंगे. भारत विमान बनाने में सदियों से आगे रहा है. हमारे वेदों में विमान तकनीक का जिक्र मिलता है. पुष्पक विमान का जिक्र रामायण में भी हैं. उन्होंने कहा कि इस कंपनी से नई क्रांति का उदय होगा. इसके साथ ही युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध भी होंगे.इससे पहले कंपनी के स्वामी साजिद अंसारी ने कंपनी की उपलब्धियां गिनाई. उन्होंने बताया कि कंपनी साल 1936 में स्थापित हुई थी. जो अब दुनिया के विभिन्न देशों में काम कर रही है. प्रधानमंत्री ने मई में भारत ड्रोन महोत्सव का उद्घाटन किया था. इस दौराने उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का भी दौरा किया था. उन्होंने देश के युवाओं की इनोवेटिव भावना से उत्साहित पीएम मोदी ने ड्रोन उड़ाने के लिए समय भी निकाला था. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि ड्रोन, पूरे भारत में विकास पर नज़र रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. पीएम ने कहा, “चाहे आपदा प्रबंधन हो, कृषि हो, निगरानी हो, मीडिया हो या पर्यटन; ड्रोन जनता को सेवाएं प्रदान करने में क्रांति लाने के साथ साथ जीवन को भी आसान बनाएंगे. पीएम ने कहा था कि सरकार, भारत में ड्रोन इंडस्ट्री को पूरा सहयोग देगी.. किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने के लिए नौ लाख रुपये से खरीदे गए ड्रोन के नहीं उड़ने के डीएम के जांच के आदेश हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। ढाई माह में भी ड्रोन प्रकरण की जांच नहीं हो पाई है, जबकि, जांच कर रहे अधिकारी ट्रांसफर होकर रिलीव भी हो चुके हैं।शासन के निर्देश पर जमालपुर कलां सहकारी समिति की ओर से 31 मार्च 2024 को किसानों के खेतों में खड़ी फसल पर दवा, खाद एवं कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन खरीदा गया था ताकि किसानों की फसलों पर स्प्रे करने में आसानी हो सके। उन्हें स्प्रे करने के लिए मेहनत भी कम करनी पड़े। ड्रोन से फसलों पर स्प्रे करने के लिए समिति के एक कर्मचारी को ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग पर 30 हजार रुपये खर्च हुए। लाखों रुपये खर्च करने के दो साल बाद भी किसी खेत में स्प्रे नहीं किया गया।किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने के लिए नौ लाख रुपये से खरीदे गए ड्रोन के नहीं उड़ने के डीएम के जांच के आदेश हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। ढाई माह में भी ड्रोन प्रकरण की जांच नहीं हो पाई है, जबकि, जांच कर रहे अधिकारी ट्रांसफर होकर रिलीव भी हो चुके हैं।शासन के निर्देश पर जमालपुर कलां सहकारी समिति की ओर से 31 मार्च 2024 को किसानों के खेतों में खड़ी फसल पर दवा, खाद एवं कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन खरीदा गया था ताकि किसानों की फसलों पर स्प्रे करने में आसानी हो सके। उन्हें स्प्रे करने के लिए मेहनत भी कम करनी पड़े। ड्रोन से फसलों पर स्प्रे करने के लिए समिति के एक कर्मचारी को ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग पर 30 हजार रुपये खर्च हुए। लाखों रुपये खर्च करने के दो साल बाद भी किसी खेत में स्प्रे नहीं किया गया।किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने के लिए नौ लाख रुपये से खरीदे गए ड्रोन के नहीं उड़ने के डीएम मयूर दीक्षित के जांच के आदेश हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। ढाई माह में भी ड्रोन प्रकरण की जांच नहीं हो पाई है, जबकि, जांच कर रहे अधिकारी ट्रांसफर होकर रिलीव भी हो चुके हैं।शासन के निर्देश पर जमालपुर कलां सहकारी समिति की ओर से 31 मार्च 2024 को किसानों के खेतों में खड़ी फसल पर दवा, खाद एवं कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन खरीदा गया था ताकि किसानों की फसलों पर स्प्रे करने में आसानी हो सके। उन्हें स्प्रे करने के लिए मेहनत भी कम करनी पड़े। ड्रोन से फसलों पर स्प्रे करने के लिए समिति के एक कर्मचारी को ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग पर 30 हजार रुपये खर्च हुए। लाखों रुपये खर्च करने के दो साल बाद भी किसी खेत में स्प्रे नहीं किया गया। विशेष चौहान की ओर से 29 मई को डीएम से शिकायत करने पर जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां मोनिका को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए थे। जिला सहायक निबंधक ने अपर जिला सहकारी अधिकारी को जांच सौंपी थी। उन्होंने समिति में जाकर जांच के लिए दस्तावेज भी हासिल किए थे लेकिन अब तक जांच का कुछ अता-पता नहीं है। हरिद्वार का जनपद से ट्रांसफर भी हो चुका है और रिलीव भी कर दिया गया है। ऐसे में डीएम के समिति में हुए ड्रोन भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के आदेश बेअसर साबित हो रहे हैं। अपर जिला सहकारी अधिकारी ने जांच के दौरान बातचीत में बताया था कि ड्रोन की बैटरी गायब है, इसलिए ड्रोन को फसलों पर स्प्रे के लिए नहीं उड़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया था कि ड्रोन देने वाले कंपनी से बैटरी की जानकारी मांगी गई है लेकिन इसके बाद ड्रोन की जांच ठंडे बस्ते में चली गई। जांच हुई या नहीं यह भी जिला सहायक निबंधक नहीं बता पा रही हैं। सहकारी समिति किसानों की संस्था है। किसानों के पैसे से नौ लाख रुपये का ड्रोन खरीद लिया गया लेकिन उसे किसानों के काम में नहीं लिया जा रहा है। पैसे की बर्बादी की गई है वहीं, पूर्व कृषि निदेशक ने भी कंपनी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में न तो कंपनी ने उनसे संपर्क किया और न ही कोई ऐसा अनुबंध हुआ.इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी आधिकारिक प्रक्रिया, दस्तावेज या भुगतान के कंपनी अनुबंध का दावा कैसे कर रही है. फिलहाल शासन स्तर पर गहन जांच की तैयारी है, जिसके बाद ही इस रहस्यमयी प्रकरण का सच सामने आ सकेगा. .लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











