• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

*मंडी के अभाव में बिचौलियों के हाथों मेहनत की कमाई लुटाने को मजबूर हैं

13/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
14
SHARES
17
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
जनपद में कृषि विभाग के पास 52 हजार 653 किसान पंजीकृत हैं। ये सभी किसान छोटे किसान हैं। लेकिन, इनमें अधिकांश अभी भी खेती किसानी से जुड़े हुए हैं। जबकि अन्य पहाड़ी जनपदों में खेती से किसान बड़ी संख्या में विमुख हो रहे हैं। टिहरी और पौड़ी जनपद में खाली होते गांव और बंजर खेत इसकी तस्दीक करा रहे हैं। खेती से विमुख होने का सबसे बड़ा कारण जंगली जानवरों का फसलों को पहुंचाया जा रहा नुकसान है। जंगली सूअर, बंदर, सेही, लंगूर और भालू पहाड़ की छोटे किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। पहाड़ के किसानों की इस ज्वलंत समस्या को कृषि विभाग और उद्यान विभाग भी जानता है, लेकिन इसका समाधान नहीं किया गया है। फसल सुरक्षा के साथ उत्तरकाशी जनपद के किसानों के सामने दूसरी बड़ी समस्या विपणन की है। सेब की फसल का तो आसानी से विपणन हो जाता है। लेकिन, सब्जियां, टमाटर, मटर, आलू आदि फसलों के विपणन को लेकर किसानों के सामने समस्या खड़ी हो जाती है, जिससे काश्तकारों को उनकी फसलों के उचित दाम नहीं मिल पाते हैं। रवाई घाटी का समाज सिर्फ अपनी कृषि व्यवस्था पर बर्षों से टिका रहा और पूरे गढ़वाल मंडल का ही ही नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश व हिमाचल के कई जिलों का अन्नदाता कहलाता है! यही नहीं इस घाटी के लाल चावल विश्व भर के कई देशों में निर्यातित किये जाते हैं! रामासिराई पुरोला बाजार का उपरी क्षेत्र व कमलसिराई निचला क्षेत्र कहा जा सकता है! यहाँ हिमनदों से निकलने वाली केदार गाड़ के अलावा कई छोटे बड़े गाड़ गदेरे आगे चलकर कमल नदी के रूप में पुकारी जाती है! यह नदी अपने उद्गम स्थल से 30 किमी. चलकर रामा सिराई व कमल सिराई के दोनों छोरों पर स्थिति लगभग 4600 हैक्टेअर भूमि को सिंचित करती है! जिसमें सचमुच अन्न रुपी सोना उगता है!रंवाई घाटी के किसानों के लिए करीब दस करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई कृषि उत्पादन मंडी समिति आज भी शोपीस बनकर रह गई है. धारी वल्ली में निर्मित अत्याधुनिक मंडी भवन का संचालन शुरू न होने से क्षेत्र के काश्तकारों को अपनी उपज बेचने के लिए आज भी बाहरी मंडियों का रुख करना पड़ रहा है. स्थानीय स्तर पर विपणन की सुविधा नहीं मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ समय और परिवहन पर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है.रंवाई घाटी टमाटर समेत कई नकदी फसलों के उत्पादन के लिए प्रदेशभर में पहचान रखती है. हर वर्ष यहां बड़ी मात्रा में टमाटर, शिमला मिर्च, राजमा और अन्य सब्जियों का उत्पादन होता है. इसके बावजूद स्थानीय मंडी के अभाव में किसान अपनी उपज को सड़क किनारे एकत्र कर ट्रकों का इंतजार करने को मजबूर हैं. कई बार पूरा दिन केवल माल लोड कराने में ही निकल जाता है. इस दौरान किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए स्वयं चौकीदारी करनी पड़ती है, जिससे उनका बहुमूल्य समय नष्ट होता है.स्थानीय मंडी समिति का संचालन शुरू न होने से अधिकांश किसान अपनी उपज बिचौलियों के माध्यम से बेच रहे हैं. किसानों का कहना है कि बिचौलियों पर निर्भर रहने के कारण उन्हें बाजार का उचित मूल्य नहीं मिल पाता. यदि नौगांव की मंडी चालू हो जाती तो खेतों से सीधे उपज मंडी तक पहुंचती और वहां से व्यवस्थित तरीके से बाहरी बाजारों में भेजी जाती. इससे किसानों को भारी-भरकम परिवहन खर्च से राहत मिलने के साथ उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होती. किसान काश्तकार नयन सिंह बर्त्वाल, विजय बंधानी और हरिमोहन सिंह का आरोप है कि इस वर्ष उन्हें पूरी उम्मीद थी कि नई मंडी का संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन जनप्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी के चलते अब तक यह संभव नहीं हो सका. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई मंडी का उपयोग न होना सरकारी संसाधनों की अनदेखी का उदाहरण है. किसानों और स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों के इंतजार के बाद करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह मंडी जल्द ही अस्तित्व में आएगी और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ काश्तकारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. जनपद की रवाईंघाटी में 1500 से अधिक सेब बगवान हैं। यमुनाघाटी की स्योरी फल पट्टी में करीब 1200 परिवारों के सेब के बगीचे हैं। उधर, पुरोला व मोरी में भी 500 से अधिक परिवार की आर्थिकी सेब बागवानी पर ही टिकी हुई है। नौगांव (उत्तरकाशी)। खेती-बागवानी पर टिकी आजीविका वाले रवाईं घाटी के किसानों को क्षेत्र में एक अदद मंडी का इंतजार है। राज्य बनने के दो दशक बाद भी सरकार ने यहां मंडी की स्थापना नहीं की। वर्ष 2010 में तत्कालीन सरकार ने नौगांव में मंडी समिति को स्वीकृति तो दी, लेकिन अभी तक मंडी नहीं खुली।रवाईं घाटी के लोगों की आजीविका खेती-बागवानी पर टिकी है। बड़े किसान को स्वयं अपने उत्पाद मैदानी मंडियों तक पहुंचाकर मुनाफा कमाते हैं, लेकिन छोटे किसान बिचौलियों के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने को मजबूर हैं। फल, सब्जी एवं नकदी फसलों के व्यवसायिक उत्पादन को देखते हुए क्षेत्र के किसान लंबे समय से रवाईं घाटी में मंडी स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन मंडी आज तक नहीं खुली। ऐसे में सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा परवान नहीं चढ़ पा रही है और किसानों में रोष है। किसान मेहनत कर खेती-बागवानी को आजीविका का जरिया बनाने को तैयार हैं, लेकिन विपणन की ठोस व्यवस्था के अभाव में किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। क्षेत्र में मंडी खोलकर विपणन के इंतजाम करके ही किसानों की आय में इजाफा किया जा सकता है। किसान मेहनत कर खेती-बागवानी को आजीविका का जरिया बनाने को तैयार हैं, लेकिन विपणन की ठोस व्यवस्था के अभाव में किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। क्षेत्र में मंडी खोलकर विपणन के इंतजाम करके ही किसानों की आय में इजाफा किया जा सकता है। रवाई घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक संघ उत्तरकाशी सरकार किसानों को जैविक उत्पादन के लिए प्रेरित कर उत्पादों की ब्रिक्री अपने हाथों में ले। इसके लिए मंडी निश्चित की जाए। साथ ही कृषि उपकरण सब्सिडी पर उपलब्ध कराकर तकनीकी सहयोग भी किया जाए। सरकार से किसानों को यह भी उम्मीद है कि वह किसान के उत्पाद बढ़ाने के प्रयासों में मदद के साथ ही जंगली जानवरों से भी खेती के नुकसान को रोकने के लिए कदम उठाएगी। कृषि फसल बीमा का सरलीकरण किया जाए। जनपद के रवाई घाटी के बड़कोट, नौगांव, पुरोला और मोरी तहसील अपनी नगदी फसलों और सेब का उच्च स्तर पर उत्पादन होता है. यहां का आलू सहित मटर, लाल चावल सहित अन्य नकदी फसलें देश में मंडियों में अपना विशेष स्थान रखती हैं, लेकिन कई बार आपदा और अन्य कारणों से काश्तकारों की फसलें मंडियों तक न पहुंचने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. साथ ही मैदानी क्षेत्र की मंडियों की दूरी अधिक होने के कारण काश्तकारों को फसल का समर्थन मूल्य और वाहनों के खर्चे में भी नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए रवाई घाटी के काश्तकार लंबे समय से मांग कर रहे थे कि क्षेत्र में एक मंडी खुलनी चाहिए.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share6SendTweet4
Previous Post

डोईवाला: 16 अगस्त तक गैस कनेक्शन धारकों को करानी होगी ई-केवाईसी

Next Post

नौ लाख का ड्रोन दो साल से शोपीस

Related Posts

उत्तराखंड

माँ गंगोत्री की पावन धरती से शुरू हुई सेवा यात्रा भगवान बदरीविशाल की भूमि पर हुई पूर्ण

September 30, 2026
7
उत्तराखंड

डोईवाला: जतिन की रणनीति से अध्यक्ष पद पर यूएसएफ की ऐतिहासिक जीत

September 30, 2026
85
उत्तराखंड

डोईवाला: फतेहपुर टांडा में बालाजी एसोसिएट स्टोन क्रशर बंद रखने के निर्देश, दोबारा होगी जांच

September 30, 2026
29
उत्तराखंड

20 हजार फीट की ऊंचाई पर चलने वाला पहला हेली रेस्क्यू

September 30, 2026
6
उत्तराखंड

अनाजों में राजा माना जाने वाला मंडुवा

September 30, 2026
6
उत्तराखंड

सरकार के सामने अब सिर्फ सफाई नहीं, कचरा रोकने की चुनौती

September 30, 2026
9

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67749 shares
    Share 27100 Tweet 16937
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37458 shares
    Share 14983 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

माँ गंगोत्री की पावन धरती से शुरू हुई सेवा यात्रा भगवान बदरीविशाल की भूमि पर हुई पूर्ण

September 30, 2026

डोईवाला: जतिन की रणनीति से अध्यक्ष पद पर यूएसएफ की ऐतिहासिक जीत

September 30, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.