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स्वीकृत सुरक्षा पदों पर आज तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं

14/07/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

दान-चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण सामने आने से पहले भी बदरीनाथ धाम में विवाद सामने आते रहे हैं, लेकिन इन्हें हमेशा ही नजरअंदाज किया गया।मंदिर की सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था व दान-चढ़ावा गणना पर नजर रखने के लिए वर्ष 2024 में मजबूत सुरक्षा ढांचा बनाने की कवायद शुरू तो हुई, जो अंजाम तक नहीं पहुंची।तब इसे सुरक्षा संवर्ग नाम देकर इसमें बाकायदा 57 पद स्वीकृत किए गए थे, जिन पर आज तक नियुक्तियां नहीं हो पाईं।बदरी-केदार धाम की सुरक्षा जिम्मेदारी कभी पुलिस तो कभी आइटीबीपी के पास रहती है, लेकिन मंदिर के अंदर की सुरक्षा आज भी भगवान भरोसे है।वर्ष 1984 में मंदिर की सुरक्षा को लेकर चार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी, जो कालांतर में सुरक्षा के बजाय सेवा भाव में जुट गए। इनके पास न बंदूक है, न डंडा और न वर्दी ही।ऐसे में ये सुरक्षाकर्मी कम स्वयं सेवक ज्यादा नजर आते हैं। वर्तमान में बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अधीन बदरी-केदार धाम समेत 47 मंदिर हैं और सभी जगह सुरक्षा का जिम्मा स्वंय सेवकों के भरोसे है।वर्ष 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष के नेतृत्व वाली मंदिर समिति ने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली बनाई थी। इसी के साथ सुरक्षा संवर्ग की आवश्यकता को प्रमुखता देते हुए इसके लिए भी कार्ययोजना बनी।तब सुरक्षा संवर्ग में 57 पदों की आवश्यकता बताते हुए पद सृजन के लिए शासन से पत्राचार हुआ और जुलाई 2024 में शासन ने इन पदों को भरने की स्वीकृति भी दे दी।सुरक्षा संवर्ग में मुख्य मंदिर सुरक्षा अधिकारी के लिए डीएसपी रैंक का एक पद, मंदिर सुरक्षा अधिकारी के लिए इंस्पेक्टर रैंक के दो पद और उप मंदिर सुरक्षा अधिकारी के लिए सब इंस्पेक्टर रैंक के चार पद स्वीकृत थे।इन पर तैनाती नागरिक पुलिस व अद्धैसैनिक बलों से प्रतिनियुक्ति के आधार पर होनी थी।इसके अलावा मुख्य मंदिर रक्षक के 10 और मंदिर रक्षक के 40 पद भी सृजित किए गए, जो हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल रैंक के थे। इन्हें आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाना था।ऐसा हो जाता तो मंदिर में दर्शन, गणना व सुरक्षा के साथ ही भगवान बदरी विशाल के खजाने की सुरक्षा के लिए आज एक अलग ही ढांचा होता।लेकिन, जिम्मेदारों की ओर से रुचि न लिए जाने के कारण सब-कुछ धरा का धरा रह गया। नतीजा आज सबके सामने है।बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि धाम में सुरक्षा संवर्ग को लेकर पद स्वीकृत होने की जानकारी मिली है।भविष्य में सुरक्षा संवर्ग का ढांचा खड़ा किया जाएगा। फिलहाल सुरक्षा का मजबूत घेरा बनाने के लिए बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आइटीबीपी की दो बटालियन अस्थायी रूप से तैनात करने के लिए मंदिर समिति ने शासन को पत्र लिखा है। पुलिस की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे मंदिर से जुडे अन्य अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि भगवान नारायण का दान, चढ़ावे में श्रद्धालुओं द्वारा खजाना लुटता रहा और मंदिर में मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों, पदाधिकारियों की फौज मौन क्यों रही। मई जून में यात्र अत्यधिक बढने के साथ हर दून या दूसरे दिन दानराशि की गिनती होती है जबकि 25 जून के बाद यात्रा कम होने के कारण तीन से चार दिनों में दान चढावे की गिनती होती है। दान चढ़ावे के इसमें सोने चांदी ,हीरे आदि के जेवरात लोग श्रद्धा के साथ डालते हैं। यात्री से गुप्त दान के रुप में चढ़ाते हैं। निगरानी सुनिश्चित की जाएगी लेकिन, बड़ा सवाल यही है कि समिति के पास 45 दिन की फुटेज सुरक्षित होने के दावे के बावजूद जांच टीम को सिर्फ 13 दिन की फुटेज ही क्यों उपलब्ध कराई गई। शेष 32 दिन की फुटेज में ऐसा क्या था, जो उसे गायब कर दिया गया। चर्चा तो यह भी है कि अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को मामले में फंसते देख जान-बूझकर यह रिकार्ड मिटा दिया गया। सूत्रों के अनुसार अगर फुटेज हटाने की बात जांच में आती है तो मामले में कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।,.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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