डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
केदारनाथ धाम यात्रा की रफ्तार धीमी पड़ने के साथ ही यात्रा के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. यात्रा सीजन के दौरान जहां प्रतिदिन सफाई और स्वच्छता को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा था, वहीं अब यात्रियों की संख्या घटते ही व्यवस्थाएं भी ढीली पड़ती दिखाई दे रही हैं. बाजार क्षेत्र की कई नालियां कूड़े-कचरे से जाम हो चुकी हैं, जबकि पैदल मार्ग, अस्पताल रोड और पुलिस चौकी मार्ग पर घोड़ों-खच्चरों की लीद फैली होने से स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.लगातार हो रही बारिश के बीच नालियों के जाम होने से बरसाती पानी की निकासी बाधित हो रही है. परिणाम स्वरूप गंदा पानी दुकानों के सामने जमा होने के साथ-साथ गौरीमाई मंदिर परिसर की ओर भी बह रहा है. इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका है, वहीं श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भी आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब अस्पताल मार्ग एवं चौकी मार्ग पर फैली घोड़ों की लीद बारिश के पानी के साथ मिलकर फिसलन और दुर्गंध का कारण बन रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे दुर्घटनाओं की आशंका तो बढ़ ही रही है, साथ ही संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी मंडराने लगा है. बरसात के मौसम में यदि समय रहते सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है.स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों का आरोप है कि यात्रा के चरम समय में जहां सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है, वहीं यात्रियों की संख्या कम होते ही जिम्मेदार विभागों की सक्रियता भी कम हो जाती है. उनका कहना है कि गौरीकुंड जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल पर पूरे वर्ष स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है.क्योंकि यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का भी निरंतर आवागमन बना रहता है. व्यापार संघ अध्यक्ष ने कहा कि केदारनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के साथ ही सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावित होने लगी है. उन्होंने बताया कि बाजार क्षेत्र की नालियां कूड़े से भरी पड़ी हैं, जिससे बरसाती पानी की निकासी बाधित हो रही है और गंदा पानी दुकानों तथा मंदिर परिसर तक पहुंच रहा है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है.उन्होंने मांग की कि गौरीकुंड बाजार में नियमित सफाई अभियान चलाया जाए, नालियों की तत्काल सफाई कराई जाए तथा घोड़े-खच्चरों के आवागमन वाले मार्गों पर प्रतिदिन विशेष सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि व्यापारियों, स्थानीय निवासियों और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.उधर, जिलाधिकारी ने कहा कि गौरीकुंड की सफाई व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा स्वच्छता व्यवस्था को शीघ्र दुरुस्त कर नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











